सात चक्रो के नाम ,मंत्र ,ध्वनि एवम महत्व
मानव शरीर के सात मुख्य चक्रों के नाम मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूरक, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्रार हैं, जिनके संबंधित बीज मंत्र क्रमशः ‘लम’ ‘वं”रं’ ‘यम’ ‘हम’ ‘ॐ’ और ‘मौन/अह’ ) हैं, जो इन ऊर्जा केंद्रों को सक्रिय और संतुलित करने में मदद करते हैं।
सात चक्रों के नाम और उनके बीज मंत्र:
१.मूलाधार चक्र (Root Chakra):स्थान: रीढ़ की हड्डी का निचला भाग (गुदा और जननेंद्रिय के बीच) बीज मंत्र: लम (Lam)।
२.स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra):स्थान: नाभि के नीचे, जननेंद्रिय के ठीक ऊपर।बीज मंत्र: वं (Vam)।
३.मणिपूरक चक्र (Solar Plexus Chakra):स्थान: नाभि के क्षेत्र में। बीज मंत्र: रं (Ram)।
४.अनाहत चक्र (Heart Chakra):स्थान: हृदय के मध्य में (स्तन के बीच)।बीज मंत्र: यम (Yam)।
५.विशुद्धि चक्र (Throat Chakra):स्थान: गले के गड्ढे में (कंठ)।बीज मंत्र: हम (Ham)।
६.आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra):स्थान: दोनों भौंहों के बीच।बीज मंत्र: ॐ (Om/Aum)।
७.सहस्रार चक्र (Crown Chakra):स्थान: सिर के शीर्ष पर (ब्रह्मरंध्र)।बीज मंत्र: मौन (Silence) या अह (Ah)।
सात चक्रो का महत्व:
ये बीज मंत्र एक-अक्षर वाली ध्वनियाँ (one-syllable sounds) हैं जो चक्रों की ऊर्जा को सक्रिय करती हैं, जिससे मन, शरीर और आत्मा में संतुलन व उपचार शक्ति आती है, और कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है।