धर्म और विज्ञान
आज सदियों से संपूर्ण विश्व में मानव जीवन बहुत ही तेजी से आनंद की खोज में गतिमान है। पश्चिम इसी आनंद की खोज विज्ञान से कर रहा है। और भारत इसे धर्म में खोज रहा है। ए दोनों खोज अधूरे हैं। मेरी दृष्टि से से दोनों उसे नहीं मिल पायेंगे। क्योंकि दोनों को एक साथ मिलकर खोज पाएंगे। शरीर के लिए विज्ञान चाहिए। परंतु शरीर को ऊर्जा चाहिए जिससे विज्ञान पूर्णतः सक्षम नहीं है। शरीर की असली उर्जा का श्रोत सूक्ष्म शरीर से मिलता है। जिसे श्वासो के द्वारा और श्वासों को बेहतरीन आक्सीजन प्रकृति से मिलती है। प्रकृति ब्रह्माण्ड शक्ति युनिवर्सल एनर्जी से निर्मित है। श्वास में सिर्फ आक्सीजन नहीं होता उसके भीतर प्राण शक्ति होती है। जिसे खोजना अभी तक विज्ञान के लिए एक अभी भी चुनौती स्वरुप है। उस प्राण शक्ति को ही आप आत्मा कह सकते हैं।