
आज एक स्वस्थ व्यक्ति ढूंढ़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। सभी किसी न किसी रूप से ग्रसित हो रहे हैं। किसी न किसी रूप में शारीरिक मानसिक आर्थिक परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। अध्यात्म के वैज्ञानिकों की मानें तो यह सभी कहीं न कहीं आपके मन से संबंधित है। आपके मन में सदियों से तथाकथित धार्मिक गुरुओं ने अपने अपने स्वार्थ के लिए ऐसे ऐसे विचार भर चुके हैं जिसका परिणाम यह हुआ है कि हम सभी उन्हीं विचारों के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं। इन सभी के विचारों पर यदि आप भी विचार करेंगे तो नकारात्मक विचारों की संख्या करोड़ों अरबों में है। और हम जीवन भर उन्हीं विचारों के एक के बाद एक अपने आप आते रहते हैं। और हम कई जन्मों से इसके पीछे कभी इसके भीतर कभी इसके अगले बगल में घूमते रहते हैं। और आज हमारे सभी का जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। इन तथाकथित धार्मिक गुरुओं ने हमें हमारे जीवन ही नहीं हमारी आत्मा तक पर आज भी विचारों के रूप में राज कर रहे हैं। परिणाम स्वरूप आज हम सभी एक होकर भी अलग अलग होकर भटक रहे हैं। और किसी न किसी रूप में चाहे वह शारीरिक हो अथवा मानसिक, आर्थिक हों अथवा सामाजिक, पारिवारिक हो अथवा धार्मिक सभी का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। आइये एक बार इसके ऊपर पुनः नये ढंग से सोचते हैं। कुछ नया सोचते हैं। एक बार जरूर सोचना कि आप पंच तत्वों से बने हैं फिर अलग अलग कैसे हो सकते हैं। यह छंठवा सातवां कहां से आ रहा है। यह हमारे तथाकथित धार्मिक गुरुओं ने सदियों सदियों से हमारे भीतर डाल दिया है। और आज इस कलियुग में इसका प्रयोग राजनीति में भी हो रहा है। और हम सभी अंतर तल से इसका शिकार हो रहे हैं। पहले हमें धर्मों में बांटा गया। फिर जाति-पाति रंग-भेद में बांटा गया। अब हम सभी को पार्टियों में बांटा जा रहा है। हमारे इतने टुकड़े हो चुके हैं कि अब हमें खुद को पता नहीं चल पा रहा है कि आखिर में हम हैं कौन ? हम कहां से अलग थलग हो गये है। हमारा वास्तविक स्वरूप क्या है ? हम क्या है ? हमारे भीतर एक नया कौन आकर राज कर रहा है ? यदि आप भी कभी अकेले में बैठकर एक बार अपने भीतर झांक कर देखने की कोशिश करें। और अपने भीतर देखें। शायद जल्दी आप खुद समझ नहीं पायेंगे कि आखिर में मैं कौन हूं।
आप को परमात्मा ने जिसे हम सभी अलग अलग नामों से जानते हैं। इसे हम ब्रह्माण्ड कह सकते हैं सिर्फ और सिर्फ इंसान बनाया है। आप इतने अलग थलग पड़ कहा से कब से हो गये। यदि आज भी इनसे पूछने चले गए तो शायद की जन्म लग जायेंगे। क्योंकि एक भी उसी तथाकथित धार्मिक गुरुओं की जाल में फंसे हुए हैं। इन्हें भी एक बार एक सवाल अपने आपसे पूछना चाहिए कि ए जो बता रहे हैं क्या ए खुद जानते हैं। आज आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि कितने चिकित्सक जिस बीमारी का इलाज कर रहे हैं वै खुद इसी बीमारी से पीड़ित हैं। खुद उस बीमारी से जूझ रहे हैं और आपको उससे मुक्ति दिलाने की चिकित्सा कर रहे हैं। जो धर्म गुरु आपको जिससे मुक्ति दिलाने की घोषणा कर रहा है वह खुद उसी से ग्रसित हो रहा है। आपको मायाजाल से मुक्ति दिलाने वाला पूरे गांव की मायाजाल लेकर बैठा हुआ है। और इसे प्रतिदिन मीडिया में भी देखा जा रहा है। करोड़ों अरबों रुपए का मालिक आपको मायाजाल से मुक्ति दिलाने की घोषणा कर रहा है। कहीं न कहीं इसकी खोज भी मायाजाल ही है आज तक का इतिहास गवाह है कि भगवान बुद्ध महावीर क्राइस्ट पैगम्बर मुहम्मद इत्यादि सभी जिनकी एक दुहाई देते हैं। उनके पास पहले भले कुछ भी था उसे छोड़ कर अपने भीतर ही उन्हें सब कुछ मिला। और आपको एक धार्मिक विधियों धार्मिक स्थानों में उलझा रहे हैं। और खुद उलझे हुए हैं। आइए एक बार उसे अपने भीतर टटोलने ढूंढ़ने की कोशिश करें। इन सभी तथाकथित धार्मिक गुरुओं से मुक्ति लें।